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Friday, April 02, 2010

आज के बच्चे...


आज के बच्चे ,

होते नहीं अच्छे ...!

क्यूँ ?

पारिवारिक परिवेश ...?

समाज या देश ...?

पहनावा या वेश ...?

घर या परदेश ...?

हर जगह ,

हर क्षण ,

क्या इन सब का असर ,

बच्चों पर पड़ने से,

रह चुका है शेष ...?

बदले हुए वेशों को देखकर ,

क्या वे बदले नहीं वेश ...?

इन सब तमाम ,
अस्तित्वों के ,

परिणाम ,

प्रत्यक्ष हैं ...

आज के बच्चे ...!

जयकरन सिंह भदौरिया 'जय'